इस प्रकार से योगाभ्यास में निरत रहने पर प्रथमावस्था में साधक को मतवाले भौरों की गुनगुनाहट के समान शब्द सुनाई पड़ते हैं। पुनः बाँसुरी, बीणा आदि की झंकार-जैसे शब्द का बोध होने लगता है। तदनन्तर सांसारिक तिमिर को हटाने वाला घंटानाद जैसा शब्द श्रुतिगोचर होता है। इसके पश्चात् अन्त में मेघगर्जन-जैसी ध्वनि का अनुभव होने लगता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।