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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 37
तत्तेजो दृश्यते येन क्षणमात्रं निराकुलम् । सर्वपापविनिर्मुक्तः स याति परमां गतिम् ।।
ऐसा योगभ्यासी पुरुष जो क्षणभर भी इस तेजपुंज के दर्शन कर लेता है वह समस्त पापों से विमुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।
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