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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 34
निरन्तरकृताभ्यासादन्तरे पश्यति ध्रुवम् । तदा मुक्तिमवाप्नोति योगी नियतमानसः ।।
प्रतीकोपासना के निरन्तर अभ्यास के परिणामस्वरूप निश्चय ही अपने हृदय में स्वप्रतिविम्ब भासमान हो उठता है। ऐसी अवस्था में दृढ़ात्मा योगी मोक्ष का अधिकारी बन जाता है।
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