मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 33
यात्राकाले विवाहे च शुभे कर्मणि सङ्कटे । पापक्षये पुण्यवृद्धौ प्रतीकोपासनं चरेत् ।।
आत्म-दर्शन के पश्चात् हृदयाकाश में परमज्योति का प्रकाश फैल जाता है। यात्राकाल में, वैवाहिक काल में, मांगलिक कार्य के समय, संकटापत्र स्थिति में अथवा पाप के क्षयार्थ और पुण्य के वर्धनार्थ प्रतीकोपासना निश्चय ही श्रेयस्कर होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें