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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 28
प्रतीकोपासना कार्या दृष्टादृष्टफलप्रदा । पुनाति दर्शनादत्र नात्र कार्या विचारणा ।।
अब यहाँ प्रतीक उपासना का उल्लेख किया जा रहा है। यह प्रतीक उपासना देखी-अनदेखी फल को देती है एवं उसके केवल दर्शनभात्र से ही आराधक निःसन्देहरूप से पवित्र हो जाता है।
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