विषयासक्ति से दूर रहने वाला गृहस्थाश्रमी योगसाधन द्वारा विमुक्त हो जाता है। इसकी साधना गृहस्यों के लिए सिद्धिदायक होती है। अतः सभी गृहस्थाश्रमी को मंत्रजाप के सहित इसकी साधना निष्पन्न करनी चाहिए।
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