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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 254
गृहस्थश्चाप्यनासक्तः स मुक्तो योगसाधनात् । गृहस्थानां भवेत् सिद्धिरीश्वराणां जपेन वै । योगक्रियाभियुक्तानां तस्मात्संयतते गृही ।।
विषयासक्ति से दूर रहने वाला गृहस्थाश्रमी योगसाधन द्वारा विमुक्त हो जाता है। इसकी साधना गृहस्यों के लिए सिद्धिदायक होती है। अतः सभी गृहस्थाश्रमी को मंत्रजाप के सहित इसकी साधना निष्पन्न करनी चाहिए।
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