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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 252
मोक्षार्थिभ्यश्च सर्वेभ्यः साधुभ्यः श्रावयेदपि । क्रियायुक्तस्यसिद्धिः स्यादक्रियस्यकथम्भवेत् ।।
इसके द्वारा सभी मोक्षार्थियों, सज्जनों, श्रवण करने वालों तथा क्रियाशील मनुष्यों को निश्चय ही सिद्धि मिलती है, किन्तु निश्वेष्ट और निष्क्रिय व्यक्ति के लिए किस प्रकार सम्भव हो सकता है?
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