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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 251
योगसिद्धिर्भवेत्तस्य क्रमेणैव न संशयः । स योक्षं लभते धीमान् य इदं नित्यमर्चयेत् ।।
इस शास्त्र का नित्यप्रति आद्योपात्त पाठ करने वाले सुविज्ञ साधकों में शनैः शनैः योग की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। इस ग्रन्थ का नित्य पूजन करने वाला बुद्धिमान पुरुष अवश्य ही मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है।
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