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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 250
भवेद्वीर्यवती गुप्ता निर्वीर्या च प्रकाशिता । य इदं पठते नित्यमाद्योपान्तं विचक्षणः ।।
सिद्धाभिलाषी साधकों के लिए यह परमावश्यक है कि वे इसे किसी के समक्ष प्रकट न करें। विद्या को गुप्त रखने से वह फलवती तथा प्रकटन से फलविहीन हो जाती है।
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