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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 249
मजावितमिदं शास्त्रं गोपनीयमतो बुधैः । हठविद्या परं गोप्या योगिना सिद्धिमिच्छता ।।
शिवजी बोले - हे देवि! मेरे द्वारा कथित यह शास्त्र परम गोपनीय है। इसे विद्वान सदैव गुप्त ही रखते हैं।
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