मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 246
कोट्यैकया महायोगी लीयते परमे पदे । साधकस्तु भवेद्योगी त्रैलोक्ये सोऽतिदुर्लभः ।।
एक करोड़ का मंत्रजापक परमपद में विलीन हो जाया करता है। किन्तु इस प्रकार की साधना सम्पन्न करने वाले साधक तीनों भुवनों में बिरले ही हुआ करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें