तीस लाख जप करने के पश्चात् वह सृष्टिकर्ता ब्रह्मा तथा पालनकर्ता विष्णु के समान हो जाता है। साठ लाख जप करने के बाद रुद्रत्व तथा अस्सी लाख जप करने पर वह सर्वभूतों का प्रियभाजन बनकर अमरता पा लेता है।
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