मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 245
त्रिंशल्लक्षैस्तथा जप्तैर्ब्रह्मविष्णुसमो भवेत् । रुद्रत्वं षष्टिभिर्लक्षैरमरत्वमशीतिभिः ।।
तीस लाख जप करने के पश्चात् वह सृष्टिकर्ता ब्रह्मा तथा पालनकर्ता विष्णु के समान हो जाता है। साठ लाख जप करने के बाद रुद्रत्व तथा अस्सी लाख जप करने पर वह सर्वभूतों का प्रियभाजन बनकर अमरता पा लेता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें