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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 242
वशमायान्ति ते सर्वे नात्र कार्या विचारणा । हठात् श्रवणविज्ञानं सर्वज्ञत्वं प्रजायते ।।
हठयोगी को विशिष्ट प्रकार की श्रवण-शक्ति तथा सर्वज्ञान की शक्ति मिलती है। अर्थात् उसमें सूक्ष्मतम शब्दों के सुनने की तथा सूक्ष्म वस्तुओं के ज्ञान की शक्ति आ जाती है।
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