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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 241
त्रिपञ्चलक्षजप्तैस्तु साधकेन्द्रस्य धीमतः । सिद्धिविद्याधराश्चैव गन्धर्वाप्सरसाङ्गणाः ।।
साधक के पन्द्रह लाख जप कर लेने पर सिद्ध, विद्याधर, गंधर्व (देवगायक) और अप्सरा (देव नृत्यांगना) आदि सभी प्राणी उसके अनुगामी बन जाते हैं। यह बात निःसन्देह रूप से सत्य कही गयी है।
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