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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 240
लक्षैर्द्वादशभिर्जप्तैर्य क्षरक्षोरगेश्वराः । वशमायान्ति ते सर्वे आज्ञां कुर्वन्ति नित्यशः ।।
इस मंत्र के बारह लाख जप कर लेने के पश्चात् यक्ष, राक्षस तथा नागादि सभी जीव सदा ही उसके आदेश का अनुपालन किया करते हैं।
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