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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 24
नवयौवनसम्पन्नो मिताहारी जितेन्द्रियः । निर्भयश्च शुचिर्दक्षो दाता सर्वजनाश्रयः ।।
नवयौवन सम्पन्न, मिताहारी अर्थात् संतुलित आहारग्राही, विजितेन्द्रिय, निर्भीक, शुद्धाचारी अर्थात् पवित्र आचरण याला, सभी कार्यों को करने में निपुण, दानशील अर्थात् निःसंकोच भाव से उदारतापूर्वक दान देने वाला, शरणागतजनों का प्रतिपालक,
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