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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 236
गुरुं सन्तोष्य विधिवत् लब्ध्वा मन्त्रवरोत्तमम् । अनेन विधिना युक्तो मन्दभाग्योऽपि सिध्यति ।।
इस सिद्धि-लाभ हेतु पूर्वकथित विधि से गुरु को प्रसन्न करके मंत्रदीक्षा लेनी चाहिए। इस प्रक्रिया को अपनाने वाला मंदभागी साधक भी बड़भागी बनने का गौरव प्राप्त कर लेता है।
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