इस सिद्धि-लाभ हेतु पूर्वकथित विधि से गुरु को प्रसन्न करके मंत्रदीक्षा लेनी चाहिए। इस प्रक्रिया को अपनाने वाला मंदभागी साधक भी बड़भागी बनने का गौरव प्राप्त कर लेता है।
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