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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 235
अनुष्ठाने कृते धीमान् पूर्वसेवा कृता भवेत् । ततो ददाति कामान्वै देवी त्रिपुरभैरवी ।।
यदि इस प्रकार प्रज्ञावान साधक अनुष्ठानपूर्वक देवी त्रिपुरसुन्दरी की उपासना करे तो उसे अभीष्ट फल की उपलब्धि होती है।
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