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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 234
करवीरप्रसूनन्तु गुडक्षीराज्यसंयुतम् । कुण्डेयोन्याकृतौधीमान् जपान्तेजुहुयात्सुधीः ।।
जपान्त में सुविज्ञ साधक को योनि के आकार का एक कुण्ड बनाकर उसमें करवीर (कनेर, कनइल) पुष्प के साथ गुड़, दूध और घी मिलाकर अग्नि में आहुति देनी चाहिए।
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