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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 233
तगतश्चैकचित्तश्च शास्त्रोक्तविधिना सुधीः । देव्यास्तु पुरतो लक्षं हुत्वा लक्षत्रयं जपेत् ।।
शास्त्रोक्त विधानानुसार देवी के समक्ष एकाग्रतापूर्वक बैठकर तीन लाख की संख्या में हवन तथा एक लाख मंत्रजाप साधक को करने चाहिए।
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