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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 230
हृदये कामबीजन्तु बन्धूककुसुमप्रभम् । आज्ञरविन्दे शक्तत्याख्यं चन्द्रकोटिसमप्रभम् ।।
प्रभायुक्त कामबीज तथा आज्ञाचक्र में शक्तिसंज्ञक बीज की अवस्थिति रहती है जो करोड़ों चन्द्रमा की ज्योति के समान प्रभावान होता है।
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