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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 23
महावीर्यान्वितोत्साही मनोज्ञः शौर्यवानपि । शास्त्रज्ञोऽभ्यासशीलश्च निमोंहश्च निराकुलः ।।
अधिमात्रतम साधक के लक्षण इस प्रकार से हैं, जैसे - महान पराक्रमी, उत्साही, शूर-वीर, शास्त्रज्ञ, अभ्यास-परायण, मोहविहीन, आकुलता से रहित अर्थात् सावधान चित्त,
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