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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 229
मूलाधारेऽस्ति यत्पद्यं चतुर्दलसमन्वितम् । तन्मध्ये वाग्भवं बीजं विस्फुरन्तं तडित्प्रभम् ।।
चतुर्दल मूलाधार पद्म के मध्य विद्युत्कांति के समान वाग्भवबीज, हृत्कमल में बन्धूक पुष्प (गुलदुपहरिया) के सदृश
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