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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 228
यस्मिन्मंत्रवरे ज्ञाते योगसिद्धिर्भवेत् खलु । योगेन साधकेन्द्रस्य सर्वैश्वर्यसुखप्रदा ।।
इस सर्वश्रेष्ठ मंत्र का ज्ञान प्राप्त कर लेने पर उसे योगसिद्धि अवश्य ही मिलती है। योग के सहित उसकी साधना करने पर वह सर्वाभीष्ट सुख का दाता होता है।
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