ऐसा गृहस्थाश्रमी जो पाप-पुण्य से निर्लिप्त रहकर सभी प्रकार के संग-साथ का परित्याग कर देता है वह घर में वास करता हुआ भी पाप-पुण्य के जाल में नहीं फँसता।
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