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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 220
अतीव साधुसंलापं साधुसम्मतिबुद्धिमान् । करोति पिण्डरक्षार्थं बह्वालापविवर्जितः ।।
योगसाधन की सफलता हेतु साधक को अल्पाहारी तथा अल्पभाषी होना परम आवश्यक होता है। इसके बिना उसे सिद्धिप्राप्ति से वंचित रह जाना पड़ता हैं।
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