स्थिते देहे जीवति च योगं न श्रियते भृशम् ।
इन्द्रियार्थोपभोगेषु स जीवति न संशयः ।।
जो प्राणी इस देह में वर्तमान रहकर भी योग का आश्रयण नहीं करते वे केवल इन्द्रिय-सुख के उपभोग हेतु ही संसार में जीवित रहा करते हैं। यह बात निःसन्देह रूप से सत्य है कि ऐसे लोग झूठे सुख के मोह में पड़कर सम्पूर्ण जीवन को बेकार बना देते हैं।
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