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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 217
हठं विना राजयोगो राजयोगं विना हठः । तस्मात् प्रवर्तते योगी हठे सद्‌गुरुमार्गतः ।।
हठयोग के अभाव में राजयोग तथा राजयोग के अभाव में हठयोग की सिद्धि का मिलना असम्भव होता है। अतः साधक को श्रेष्ठ गुरु के उपदेशानुसार हठयोग के मार्ग में अग्रसर होना चाहिए।
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