मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 215
एवमभ्यासतो नित्यं स्वप्रकाशं प्रकाशते । श्रोतुं बुद्धिसमर्थार्थ निवर्तन्ते गुरोर्गिरः । तदभ्यासवशादेकं स्वतो ज्ञानं प्रवर्तते ।।
इस प्रकार के अभ्यासी साधक में स्वयं ही ज्ञानोदय हो जाया करता है। उन्हें गुरु द्वारा कथित मार्ग के अनुसरण करने की भी कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। पुनः उसे अन्य प्रकार की बातों में रुचि नहीं रहती। उस विस्मयकारी ज्ञान में उसकी प्रवृत्ति स्वतः ही हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें