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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 214
सर्वेन्द्रियाणि संयम्य विषयेभ्यो विचक्षणः । विषयेभ्यः सुषुप्त्येव तिष्ठेत्संगविवर्जितः ।।
बुद्धिमान साधक विषय-वासनाओं से इन्द्रियों को विमुख करके संगरहित होकर उसी में सुषुप्ति के समान विलीन हो जाते हैं।
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