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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 212
चराचरमिदं विश्वं परोक्षं यः करोति च । अपरोक्ष परं ब्रह्म त्यक्तंतस्मिन्प्रलीयते ।।
ऐसे लोग इस संसार को ही सत्य मान लेते हैं और उसी में विलीन हो जाते हैं। अर्थात् वे सांसारिक बंधन से कभी नहीं छूट पाते।
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