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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 210
अध्यारोपापवादाच्यां यत्र सर्वं विलीयते । तद्बीजमाश्रयेद्योगी सर्वसङ्गविवर्जितः ।।
जिस अध्यारोप-प्रत्यारोप में सभी वस्तुओं का विलय होता है उसी बीज का आश्रय ले जन-समुदाय से दूर रहकर एकाकी रूप से साधना पूरी करनी चाहिए।
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