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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 203
राजयोगो मया ख्यातः सर्वतन्त्रेषु गोपितः । राजाधिराजयोगोऽयं कथयामि समासतः ।।
हे देवी पार्वति! मैंने जिस राजयोग का कथन किया है वह सभी प्रकार से गोपनीय है। अब मैं जिस राजाधिराज योग का विस्तृत वर्णन कर रहा हूँ जिसे तुम श्रणग करो।
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