ध्यानादेव विजानाति विचित्रफलसम्भवम् ।
अणिमादिगुणोपेतो भवत्येव न संशयः ।।
इसकी महत्ता को जानने वाले योगी मेरे ही समतुल्य होते हैं। इसकी साधना करने से निश्चय ही साधक को अष्टसिद्धियों की उपलब्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।