एतत् ध्यानं सदा कुर्यादनालस्यं दिने दिने ।
तस्य स्यात्सकला सिद्धिर्वत्सरान्नात्र संशयः ।।
जो प्राणी आलस्यविहीन होकर प्रतिदिन उस शून्य के ध्यान में तत्पर रहता है वह एक वर्ष के अन्दर ही सम्पूर्ण सिद्धियों की प्राप्ति निःसन्देह रूप से कर लिया करता है।
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