मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 196
ब्रह्माण्डबाझे संचिन्त्य स्वप्रतीकं यथोदितम् । तमावेश्य महच्छून्यं चिन्तयेदविरोधतः ।।
पूर्वकथित रीति से शरीर के बाहरी भाग में अपने प्रतीक स्वरूप का साधक को ध्यान करना उचित है। जब ध्यानावस्था में चित्त का स्थिरीकरण हो जाय तब उसे महान शून्य का चिन्तन करना आवश्यक होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिव संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिव संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें