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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 195
चित्तवृत्तिर्यदा लीना तस्मिन् योगी भवेद् ध्रुवम् । तदा विज्ञायतेऽखण्डज्ञानरूपी निरञ्जनः ।।
चित्तवृत्ति के विलय होने के अनन्तर अविभक्त ज्ञानरूप निरंजन आत्मा की ज्योति योगी के हृदय में प्रकाशित होने लगती है।
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