इस सहस्रार कमल का बोध हो जाने पर मनोवृत्तियों का लय हो जाता है। इसी हेतु योगी के लिए यह अनिवार्य है कि वह इस ज्ञानोपलब्धि में निरपेक्ष भाव से सदा लगा रहे।
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