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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 190
चितवृत्तिर्यदा लीना कुलाख्ये परमेश्वरे । तदा समाधिसाम्येन योगी निश्चलतां व्रजेत् ।।
इस कुलसंज्ञक ईश्वर में अपनी मनोवृत्ति का विलयन कर लेने वाला योगी अचल समाधि में निमग्न हो जाया करता है।
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