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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 189
स्थाने परे हंसनिवासभूते कैलासनाम्नीह निविष्टचेताः । योगी हृतव्याधिरधः कृताधिर्वायुश्चिरं जीवति मृत्युमुक्तः ।।
यह कैलाससंज्ञक स्थान परमहंस का आवासीय स्थल होता है। अतः इस स्थान में अपने चित्त का स्थिरीकरण करने वाला साधक समस्त रोगों से मुक्ति दिलाने तथा मृत्यु पर विजय प्राप्त कराने वाला हो जाता है। अर्थात् वह दीर्घजीवी बन जाता है।
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