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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 188
स्थानस्यास्य ज्ञानमात्रेण नृणां संसारेऽस्मिन् सम्भवो नैव भूयः । भूतग्रामं सन्तताभ्यासयोगात् कर्तुं हर्तुं स्याच्च शक्तिः समग्राः ।।
इस कैलासीय स्थान का ज्ञान ग्रहण कर लेने पर मानव का संसार में पुनरागमन नहीं होता। इस ज्ञान के अभ्यासी साधक में समस्त प्राणियों के हेतु उत्पादक और संहारक शक्ति आ जाती है। अर्थात् इस प्रकार का ज्ञान-सम्पन्न योगी समस्त कर्म-अकर्म करने में सक्षम हो जाता है।
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