कैलासो नाम तस्यैव महेशो यन्त्र तिष्ठति ।
अकुलाख्योऽविनाशी च क्षयवृद्धिविवर्जितः ।।
शरीररूपी कैलासशिखर पर महेश्वर का निवास कहा गया है। यह कुलहीन नामक ईश्वर सदैव अविनश्चर होता है। इसमें किसी प्रकार का घटाव-बढ़ाव या परिवर्तन नहीं होता।
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