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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 186
अत ऊर्ध्वं दिव्यरूपं सहस्त्रारं सरोरुहम् । ब्रह्माण्डाख्यस्य देहस्य बाह्ये तिष्ठति मुक्तिदम् ।।
तालु के ऊपरी भाग में दिव्य रूप सहस्रार कमल ब्रह्माण्डरूप शरीर के बाह्य भाग में स्थित रहता है। यह मुक्तिप्रदाता कमल कैलास नाम से विख्यात है।
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