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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 185
सत्यं सत्यं पुनः सत्यं मम तुल्यो भवेद्ध्रुवम् । योगशास्त्रं च परमं योगिनां सिद्धिदायकम् ।।
मेरा यह कथन बारम्बार सत्य है। ऐसा साधक मेरे समतुल्य हो जाता है। यही परम योग और साधकों का सिद्धिदाता है।
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