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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 183
आनुकूल्यं ग्रहा यान्ति सर्वे नश्यन्त्युपद्रवाः । उपसर्गाः शमं यान्ति युद्धे जयमवाप्नुयात् ।।
उसके सभी अनिष्टकारी ग्रह अनुकूल हो जाते, सभी उपद्रवों के औपसर्गिक लक्षण शमित होते तथा योद्धाओं को रणभूमि में विजय-लाभ के अवसर मिलते हैं।
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