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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 178
यस्य स्मरणमात्रेण योगीन्द्रोऽवनिमण्डले । पूज्यो भवति देवानां सिद्धानां सम्मतो भवेत् ।।
इस चन्द्रमण्डल के स्मरणमात्र से श्रेष्ठ योगी देवताओं और सिद्धों के समान संसार में पूजनीय बन जाता है। अर्थात् वह समस्त ऐश्चयों का स्वामी बन जाता है।
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