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शिव संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 17
चपलः कातरो रोगी पराधीनोऽतिनिष्ठुरः । मन्दाचारौ मन्दवीयों ज्ञातव्यो मृदुमानवः ।।
इस प्रकार का साधक मन्त्र योग करने का अधिकारी होता है।
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