इस त्रिवेणी संगम में स्नानोपरांत जो पितृकर्म अर्थात् श्राद्धादि कर्मों की क्रिया करते हैं वे इसके फलस्वरूप अपने पितरों का उद्धार कर स्वयं मोक्षलाभ करते हैं।
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