इन तीन प्रकार की नाड़ियाँ में इड़ा गंगा, पिंगला यमुना तथा इनके मध्य भाग में सुषुम्ना सरस्वती के रूप में प्रवाहित होती रहती है। इन्हीं तीनों को त्रिवेणी संगम का नाम दिया गया है। इस संगम में स्नान करना परम दुर्लभ है।
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