गंगा- यमुनारूपी इड़ा-पिंगला के मध्य सरस्वतीस्वरूपा सुषुम्ना नाड़ी अदृश्य रूप से वर्तमान रहा करती है। इसमें स्नान करने वाला स्नानाचीं धन्य हो जाता है और उसे परम दुर्लभ गति प्राप्त होती है।
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